जागरिक के अनुभव

संपर्क समाज सेवी संस्था द्वारा शासकीय हाई स्कूल मुलथान कक्षा दसवीं के छात्र छात्राओं के साथ जागरिक यात्रा का पांचो जमघट पूर्ण करने के पश्चात यात्रा का समापन किया गया इस डेढ़ महीने की यात्रा में छात्र छात्राओं के द्वारा सीखे गए अनुभव को साझा किया गया बालिका शिवानी यादव के द्वारा बताया गया कि इस यात्रा में टास्क को खेल के माध्यम से पूरा करने के दौरान उन्होंने सीखा की किस तरह से बालक एवं बालिकाओं में भेदभाव किया जाता है मैंने अपने टास्क में अनुभव किया है कि मेरे गांव की एक बालिका जो कि पढ़ना चाहती थी लेकिन उनके परिवार वालों ने उनका कम उम्र में ही विवाह कर दिया मैंने अनुभव किया कि लड़कों के मुकाबले में बालिकाओं को शिक्षा की मुख्य धारा से किस प्रकार वंचित रखा जा रहा है बालिका के द्वारा बताया गया कि वह समाज में पहले बाल विवाह के बारे में इतनी जागरूक नहीं थी लेकिन जागरिक यात्रा के दौरान मेरी बाल विवाह के बारे में समझ बनी छात्र रोहित वर्मा ने बताया कि मैं पूर्व में अपने समाज के बारे में इतना जागरूक नहीं था मुझे समाज के रीति-रिवाज एवं समाज के प्रति मेरे कर्तव्य पता नहीं थे लेकिन इस जागरिक यात्रा के माध्यम से टास्क को पूरा करते हुए मैंने अनुभव किया कि किस प्रकार समाज में रीति रिवाज के माध्यम से बाल अधिकारों का हनन हो रहा है रोहित ने बताया कि हमारे समाज में किसी भी भी बालिका को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे गांव अकेले भेजा नहीं जाता परिवार वाले कहते हैं कि लड़कियों के लिए इतना ही पढ़ना काफी है मैंने गहराई से चिंतन किया कि बालिकाओं को भी बालको के मुकाबले बराबर शिक्षा मिलना चाहिए रोहित ने कहा कि मैं अपनी सिस्टर को उच्च शिक्षा दिलवाकर समाज के समक्ष मिसाल पेश करना चाहता हूं छात्र गोलू यादव के द्वारा बताया गया कि पहले मैं अपने घर एवं मोहल्ले में साफ-सफाई को लेकर निष्क्रिय था मैं अपने घर में अपने मम्मी एवं पापा के घरेलू कार्यों में बिल्कुल भी मदद नहीं करता थाl लेकिन इस जागरिक यात्रा मैं टास्को को खेलते हुए सीखा की मुझे भी अपने घर के आस-पास स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए एवं अपने मम्मी पापा को घरेलू कार्यों में मदद करना चाहिए, मैंने अपने दोस्तों को भी मोहल्ले की साफ सफाई एवं स्वच्छता को लेकर जागरूक कर रहा हूं एवं पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए पेड़ पौधे भी अपने घर के पीछे लगाए हैं छात्रों के इन अनुभवों को देखकर मैंने भी यह अनुभव किया है कि इस यात्रा के माध्यम से छात्र-छात्राएं अपने अधिकार एवं अपने कर्तव्यों को समझने लगे हैं एवं कुछ छात्र छात्राओं ने टास्को को पूरा करते हुए अपने जीवन में उनको उतारा भी है वे खुद भी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं एवं दूसरों को भी अपने कर्तव्य अवगत करा रहे हैं