कस्तूरबा कन्या एडुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट समाज के दबे कुचले सामाजिक एवं आर्थिक रूप से अनुसूचित जाति के अंतिम वर्ग के किशोरियों में शिक्षा के माध्यम से स्वतंत्रता, गरिमा व अधिकार के लिये समर्पित है। इसकी शुरुआत 2016 में हुई । यह एक समाजिक संगठन की तरह बिहार के आदिवासी बहुल्य क्षेत्र के ऐसे वर्ग में शिक्षा, स्वास्थ, दक्षता (हुनर) को बढावा दे कर उनकी आमदनी (रोजीरोटी) बढ़ाने हेतु कार्यरत है। यह संस्था किशोरियों (13-19 वर्ष के बीच) में नेतृत्व करने की हुनर बढाने लिये कार्यरत है। यह संस्था समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े तबके अर्थात समाज के अधिकारविहीन किशोरियों को केन्द्र बिन्दू मे रख कर कार्य करता है।
यह संस्था ट्रस्ट निबंधन कानून (1860)के अंर्तगत निबंधित है । ट्रस्ट थारू जाति व विशेषकर दलित व पिछड़े वर्ग के किशोरियों के समूह के साथ उनके सतत विकास करने में मुख्य भूमिका निभा रहा है ।