Sanvidhan Jagrik- AAS,Indore

1.बालिका कविता पयासी

2.उम्र 14

3.कक्षा 8 वी

4.स्कूल शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय घाटाबिल्लोद, जिला धार।

 

बालिका कविता पयासी को मौलिक कर्तव्य से संबंधित एक टास्क यह मिला था कि उसे उसके समुदाय में ऐसे घरों का सर्वे करना था जहां पर बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है तथा उनका कारण भी जानना था कि उन्होंने स्कूल क्यों छोड़ा था एवं ऐसे कितने बच्चे हैं जो काम पर जाते हैं! बालिका कविता पयासी ने बताया कि हमने हमारी कॉलोनी में सर्वे किया एवं जिसमें  हमें ऐसे 10 बच्चे मिले जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया था l​ जब बालिका कविता ने उन बच्चों से पूछा कि आपने स्कूल क्यों छोड़ दिया तो उन्होंने बताया कि हम फैक्ट्री में काम करने के लिए जाते हैं एवं हमारे परिवार की स्थिति खराब हैं तथा हमारे माता-पिता नहीं चाहते कि हम स्कूल जाएं ! कविता ने उन बच्चों को समझाया कि अभी उनकी पढ़ने की उम्र है काम करने कि नहीं,  सभी बच्चों को पढ़ने का अधिकार है , यदि आपके इस अधिकार को छीना जाता है तो उनके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती हैं ! यदि आप पढ़ना चाहते हो तो हम आपकी मदद करेंगे एवं सरकार की जो योजनाएं चल रही है उससे हम आपको जोड़ेंगे ।

उन बच्चों के साथ ही कविता ने उनके माता-पिता से भी बात कर उन्हें समझाया कि वह अपने बच्चों को पढ़ाई करने के लिए भेजे , काम पर ना भेजें क्योंकि पढ़ना बच्चों का अधिकार है।

 साथ ही कविता उस फैक्ट्री में भी गई जहां पर बच्चे काम करते थे, वहां जाकर फैक्ट्री के मैनेजर से बात की व उन्हें कहा कि आप इन बच्चों से काम क्यों करवाते हो।  मैनेजर ने बताया कि यह बच्चे खुद अपनी मर्जी से यहां पर काम करने के लिए आए हैं, हमने जबरदस्ती इनको काम पर नहीं रखा है और आप बीच में ना बोले , कविता पयासी ने उन्हें बताया कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से आप फैक्ट्री में काम नहीं करवा सकते हैं । यदि आप इन बच्चो से काम  करवाओ गे तो मैं पुलिस व  चाइल्ड हेल्पलाइन को बताऊंगी, जिससे आप के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जा सकती हैं।   फैक्ट्री के मैनेजर ने कहा कि कहीं भी शिकायत करने की जरूरत नहीं है मैं इन बच्चों को अब काम पर नहीं रखूंगा।

इस जाग्रीक जर्नी में टास्क के माध्यम से कविता ने अपने कर्तव्य को पूरा किया तथा कविता अब इन बच्चों को स्कूल में एडमिशन हेतु प्रयास कर रही है एवं कविता का ऐसा मानना है कि हम सब को भी हमारे आसपास इस तरह के सर्वे कर ऐसे बच्चों की मदद करना चाहिए जो इस समस्या से जूझ रहे हैं एवं हमें हर संभव उनकी मदद करने का प्रयास करते रहना चाहिए।