Sanvidhan Jagrik- AAS,Indore
बालिका- महक पाटीदार
बालिका की उम्र- 14 वर्ष
,कक्षा- आठवीं
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल लेबड जिला धार ,
बालिका महक पाटीदार को मौलिक अधिकार का एक टास्क दिया गया था !उन्हें अपनी माता से पूछना था कि जब वह पहली बार मां बनने वाली थी तब उन्हें क्या महसूस हो रहा था पहले बालिका घबरा रही थी कि पता नहीं मां क्या बोलेगी कहीं पीटने ना लगे' फिर बालिका ने हिम्मत करके अपने मां से पूछा कि जब मैं पैदा हुई तो आपको और सब को कैसा लगा मां द्वारा बताया गया !कि जब तुम पैदा हुई थी तो मैं बहुत खुश थी परंतु तेरे पिता और तेरे दादा दादी को ज्यादा खुशी नहीं थी ,उन्हें लड़के की चाहत थी इसलिए वह मुझसे बात नहीं करते ना ही तुझसे प्यार करते थे ,यह सब बातें बालिका की मां को अच्छी नहीं लगती थी परंतु बालिका के दादा दादी का कहना था कि यह तो पराए घर चली जाएगी हमारा वंश तो लड़का ही चलाएगा यह सब बातें बालिका की मां को सुनना पड़ती और कई ताने भी फिर दूसरी बार जब भाई हुआ तब क्या हुआ बालिका ने अपनी मां से पूछा मां द्वारा बताया गया कि जब दूसरी बार में मां बनने वाली थी तब तेरी दादी ने बहुत मन्नते मांगी कि इस बार लड़का हो जाए नहीं तो मुझसे बोला गया कि तू अपने मायके चले जाना अगर इस बार लड़का नहीं हुआ तो मां ने कहा कि भगवान की दया रही मुझ पर की दूसरी बार तेरा भाई हुआ तब तो तेरे पापा और दादा दादी ने सभी को मिठाई खिलाई और बहुत खुश हुए और तेरे भाई को बहुत प्यार दुलार देते थे ,यह सब बातें बालिका को अच्छी नहीं लगी और वह जब भी टास्क के दौरान बात करती तो रो देती थी जब वह सविधान jagrik से जुड़ी तो उन्हें अपनी मन की बात हमें बताने का मौका मिला ,साथ ही वह जब संविधान के प्रति जागरूक हो गई तो बालिका ने अपने परिवार को लड़का और लड़की में भेदभाव न करने के लिए समझाया और बताया कि दोनों को समान अधिकार है! चाहे लड़का हो या लड़की आप उनके साथ लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते हैं हमें संविधान ने बराबरी का अधिकार दिया है!




